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Post 20- SREYAS ASTRO | ज्योतिष एवं अध्यात्म

27 नक्षत्रों के गायत्री मंत्र

जन्म नक्षत्र गायत्री जप, पूज्य अधिदेवता एवं 54 दिनों के शास्त्रीय साधना नियम

“नक्षत्र अधिदेवता की विधिवत उपासना करने से प्रारब्ध के दोष शांत होते हैं और ईश्वर की पूर्ण कृपा प्राप्त होती है।”

| 1. प्रस्तावना (भूमिका)

वैदिक ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, मनुष्य के पूर्व जन्म के कर्म और वर्तमान जीवन के भाग्य निर्धारण में 'जन्म नक्षत्र' की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण होती है। अपने जन्म नक्षत्र के अधिदेवता की उपासना और नक्षत्र गायत्री मंत्र का नियमित जप करने से जीवन के समस्त नक्षत्र दोष शांत होते हैं और मानसिक शांति, दीर्घायु एवं सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है।

| 2. नक्षत्र गायत्री जप के प्रमुख नियम एवं विधि

  • जप अवधि: लगातार 54 दिनों तक प्रतिदिन प्रातःकाल पूर्व दिशा की ओर मुख करके जप करें।
  • जप संख्या: प्रतिदिन 108 बार (अथवा सामर्थ्यानुसार 27 बार) जप करना चाहिए।
  • प्रारंभ का दिन: अपने जन्म नक्षत्र के लिए जो मित्र/साधक तारा (अनुकूल नक्षत्र) हो, उस शुभ दिन से इस साधना को प्रारंभ करें।
  • महिलाओं के लिए विशेष नियम: महिलाएं मासिक धर्म के दिनों में जप न करें। मासिक धर्म समाप्त होने के 5वें दिन से छूटे हुए दिनों की गिनती आगे बढ़ाते हुए कुल 54 दिन पूर्ण करें।
  • पूर्णता दिवस पूजन: 54वें दिन साधना पूर्ण होने पर अपने इष्ट देव के मंदिर जाकर विधिवत अर्चना/पूजा करवाएं।
  • महत्वपूर्ण निर्देश: संकल्प एवं अर्चना के समय केवल अपना नाम, जन्म नक्षत्र और गोत्र ही कहें; राशि का उल्लेख न करें (राशि को छोड़ दें)

| 3. मूल विषय: 27 नक्षत्र गायत्री मंत्र एवं पूज्य अधिदेवता

1. अश्विनी (स्वामी: केतु)

पूज्य देवता: अश्विनी कुमार / श्री गणेश

"ॐ अश्विनी देवते विद्महे श्वेत रूपाय धीमहि तन्नो अश्वौ प्रचोदयात्॥"

2. भरणी (स्वामी: शुक्र)

पूज्य देवता: यमराज / मां दुर्गा

"ॐ धर्मराजाय विद्महे दण्डहस्ताय धीमहि तन्नो यमः प्रचोदयात्॥"

3. कृत्तिका (स्वामी: सूर्य)

पूज्य देवता: अग्नि देव / भगवान कार्तिकेय (मुरुगन)

"ॐ अग्निदेवाय विद्महे सप्तजिह्वाय धीमहि तन्नो अग्निः प्रचोदयात्॥"

4. रोहिणी (स्वामी: चन्द्र)

पूज्य देवता: ब्रह्मा जी / भगवान श्रीकृष्ण

"ॐ चतुर्मुखाय विद्महे कमलासनाय धीमहि तन्नो ब्रह्मा प्रचोदयात्॥"

5. मृगशिरा (स्वामी: मंगल)

पूज्य देवता: चन्द्र देव / भगवान कार्तिकेय

"ॐ चन्द्रमसे विद्महे ताराधीशाय धीमहि तन्नो चन्द्रः प्रचोदयात्॥"

6. आर्द्रा (स्वामी: राहु)

पूज्य देवता: रुद्र / भगवान शिव

"ॐ रुद्राय विद्महे महादेवाय धीमहि तन्नो रुद्रः प्रचोदयात्॥"

7. पुनर्वसु (स्वामी: गुरु)

पूज्य देवता: माता अदिति / प्रभु श्रीराम

"ॐ अदिति देव्यै विद्महे देवमात्रे धीमहि तन्नो अदितिः प्रचोदयात्॥"

8. पुष्य (स्वामी: शनि)

पूज्य देवता: देवगुरु बृहस्पति / दक्षिणामूर्ति

"ॐ बृहस्पतये विद्महे देवाचार्याय धीमहि तन्नो गुरुः प्रचोदयात्॥"

9. आश्लेषा (स्वामी: बुध)

पूज्य देवता: सर्प देवता / शेषनाग / नागराज

"ॐ सर्पराजाय विद्महे नागदेवाय धीमहि तन्नो सर्पः प्रचोदयात्॥"

10. मघा (स्वामी: केतु)

पूज्य देवता: पितृ देवता / भगवान शिव

"ॐ पितृदेवताय विद्महे महापुण्याय धीमहि तन्नो पितृः प्रचोदयात्॥"

11. पूर्वाफाल्गुनी (स्वामी: शुक्र)

पूज्य देवता: भग देव / मां आंडाल

"ॐ भगदेवाय विद्महे महाबलाय धीमहि तन्नो भगः प्रचोदयात्॥"

12. उत्तराफाल्गुनी (स्वामी: सूर्य)

पूज्य देवता: अर्यमा / भगवान अय्यप्पा

"ॐ अर्यमाय विद्महे महातेजाय धीमहि तन्नो अर्यमा प्रचोदयात्॥"

13. हस्त (स्वामी: चन्द्र)

पूज्य देवता: सवितृ (सूर्य) / मां गायत्री

"ॐ सावित्रे विद्महे जगच्चक्षुषे धीमहि तन्नो सूर्यः प्रचोदयात्॥"

14. चित्रा (स्वामी: मंगल)

पूज्य देवता: त्वष्टा (विश्वकर्मा) / चक्रत्तालवार

"ॐ त्वष्ट्रे विद्महे रूपकाराय धीमहि तन्नो त्वष्टा प्रचोदयात्॥"

15. स्वाति (स्वामी: राहु)

पूज्य देवता: वायु देव / भगवान नृसिंह / श्री हनुमान

"ॐ वायुदेवाय विद्महे प्राणनाथाय धीमहि तन्नो वायुः प्रचोदयात्॥"

16. विशाखा (स्वामी: गुरु)

पूज्य देवता: इंद्राग्नि / भगवान मुरुगन

"ॐ इंद्राग्निभ्यां विद्महे महाशक्त्यै धीमहि तन्नो इंद्राग्नि प्रचोदयात्॥"

17. अनुराधा (स्वामी: शनि)

पूज्य देवता: मित्र देव / श्री लक्ष्मी नारायण

"ॐ मित्रदेवाय विद्महे सर्वमित्राय धीमहि तन्नो मित्रः प्रचोदयात्॥"

18. ज्येष्ठा (स्वामी: बुध)

पूज्य देवता: देवराज इंद्र / भगवान वराह

"ॐ इंद्रदेवाय विद्महे वज्रहस्ताय धीमहि तन्नो इंद्रः प्रचोदयात्॥"

19. मूल (स्वामी: केतु)

पूज्य देवता: निर्ऋति (राक्षस देव) / श्री हनुमान

"ॐ निर्ऋतये विद्महे रक्षोगणाय धीमहि तन्नो निर्ऋतिः प्रचोदयात्॥"

20. पूर्वाषाढ़ा (स्वामी: शुक्र)

पूज्य देवता: जल देवता (वरुण) / मां महालक्ष्मी

"ॐ जलदेवताय विद्महे पाशहस्ताय धीमहि तन्नो वरुणः प्रचोदयात्॥"

21. उत्तराषाढ़ा (स्वामी: सूर्य)

पूज्य देवता: विश्वेदेवा / श्री गणेश

"ॐ विश्वेदेवेभ्यो विद्महे सर्वभूताय धीमहि तन्नो विश्वेदेवाः प्रचोदयात्॥"

22. श्रवण (स्वामी: चन्द्र)

पूज्य देवता: भगवान विष्णु / श्री वेंकटेश्वर स्वामी

"ॐ विष्णवे विद्महे वासुदेवाय धीमहि तन्नो विष्णुः प्रचोदयात्॥"

23. धनिष्ठा (स्वामी: मंगल)

पूज्य देवता: अष्ट वसु / भगवान कार्तिकेय

"ॐ अष्टवसुभ्यो विद्महे भूतिदाय धीमहि तन्नो वसुः प्रचोदयात्॥"

24. शतभिषा (स्वामी: राहु)

पूज्य देवता: वरुण देव / धर्मशास्ता

"ॐ वरुणाय विद्महे समुद्रनाथाय धीमहि तन्नो वरुणः प्रचोदयात्॥"

25. पूर्वाभाद्रपद (स्वामी: गुरु)

पूज्य देवता: अजैकपाद / एकपाद रुद्र

"ॐ अजैकपादाय विद्महे एकचरणाय धीमहि तन्नो रुद्रः प्रचोदयात्॥"

26. उत्तराभाद्रपद (स्वामी: शनि)

पूज्य देवता: अहिर्बुध्न्य / भगवान शिव / कामधेनु

"ॐ अहिर्बुध्न्याय विद्महे सागरवासाय धीमहि तन्नो अहिः प्रचोदयात्॥"

27. रेवती (स्वामी: बुध)

पूज्य देवता: पूषा देव / श्री रंगनाथ स्वामी

"ॐ पूषणे विद्महे पुष्टिकराय धीमहि तन्नो पूषा प्रचोदयात्॥"

| 4. उपसंहार (निष्कर्ष)

शास्त्रोक्त नियमों का पालन करते हुए जब कोई जातक 54 दिनों तक अपने जन्म नक्षत्र के गायत्री मंत्र का श्रद्धापूर्वक जप करता है, तो उसकी कुंडली के अज्ञात ग्रह दोष एवं नक्षत्र बाधाएं स्वतः समाप्त हो जाती हैं। मन में एकाग्रता, आत्मबल और परिवार में सुख-शांति का वास होता है।

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